22-01-2026

1 समुएल 18:6–9; 19:1–7    मारकुस 3:7-12

1 Samuel 18:6–9; 19:1–7    Mark 3:7-12

Bro. Prem Tirkey

प्रिय भाइयों और बहनों, आज के दोनों पाठ में हम देखते हैं कि जब किसी पर ईश्वर की कृपा होती है, तो उसकी केवल प्रशंसा ही नहीं होती बल्कि उसका विरोध भी किया जाता है।

1 समुएल में हम देखते हैं कि जब दाऊद युद्ध से लौटता है, तो लोग उसकी वीरता की प्रशंसा करते हैं: “साऊल ने हजारों को मारा, परन्तु दाऊद ने लाखों को।” यह सुनकर साऊल के मन में दाऊद के प्रति गहरी ईर्ष्या उत्पन्न होती है। यह विरोध दाऊद के किसी दोष के कारण नहीं था, बल्कि साऊल के अपने भय और असुरक्षा से उत्पन्न हुआ।

सुसमाचार में भी हम देखते हैं कि प्रभु येसु जहाँ भी जाते हैं, वहां भीड़ उमड़ पड़ती है—लोग उनकी शिक्षाओं और चंगाई के कारण आकर्षित होते हैं। यहां तक कि अशुद्ध आत्माएं भी पहचानती हैं कि “आप ईश्वर के पुत्र हैं” लेकिन इस लोकप्रियता के बावजूद, धार्मिक अगुवों का विरोध भी बढ़ता जाता है।

इन दोनों घटनाओं में एक समानता है: जब ईश्वर किसी को चुनता है और अपने उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करता है, तो उसके चारों ओर केवल समर्थन ही नहीं, विरोध भी आता है। परन्तु अच्छी खबर यह है कि ईश्वर अपने जनों की रक्षा करता है—जैसे उसने दाऊद के लिए योनातान को भेजा, वैसे ही वह हमें भी सहारा और बुद्धि देता है।

प्रिय भाइयों और बहनों, यदि हम ईश्वर की इच्छा में चल रहे हैं और फिर भी हमें विरोध का सामना करना पड़ रहा है, तो घबराएँ नहीं। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि ईश्वर का कार्य हमारे जीवन में जीवित और सक्रिय है। आइए, हम दाऊद और येसु की तरह नम्रता और विश्वास से आगे बढ़ें, और ईश्वर पर भरोसा रखें जो हर परिस्थिति में हमारी रक्षा करता है।


22-01-2026

1 Samuel 18:6–9; 19:1–7    Mark 3:7-12

Dear brothers and sisters, we see David returning from battle, and the people rejoicing in his victories. Their praise of David over Saul sparks intense jealousy in Saul’s heart. This shows how success and God’s favour can sometimes stir jealousy in others. Even when we walk in righteousness, opposition may arise not because of our faults, but because of the insecurity and fear in others.

In gospel, Jesus is also surrounded by great crowds. His miracles and teachings draw people from everywhere. Yet, despite this popularity, opposition grows—especially from religious leaders. Evil spirits recognize His divine authority and shout, “You are the Son of God!” But Jesus silences them, knowing the time for full revelation has not yet come.

The common thread is this: when God’s favour is upon a person, it often attracts both admiration and opposition. But God protects and strengthens His chosen ones through faithful companions and divine wisdom.

Bro. Prem Tirkey
Archdiocese of Raipur